अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन करते समय कभी ना करें ये 7 गलतियां – Adopting Mindful Eating Habits

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अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन करते समय कभी ना करें ये 7 गलतियां – Adopting Mindful Eating Habits

क्या आपको पता है? 

हममें से ज्यादातर लोग भोजन तो बहुत अच्छा खाते हैं, लेकिन दुनिया का सबसे अच्छा भोजन खाने के बावजूद भी ऐसी सात गलतियां करते हैं, जिनकी वजह से अच्छे से अच्छे खाने का भी हमें कोई फायदा नहीं मिलता। 

ये ऐसी सात गलतियां हैं जो आप या तो भोजन से पहले, भोजन के वक्त या भोजन के बाद करते हैं और इनकी वजह से हेल्दी से हेल्दी खाना खाने के बावजूद भी आपको ब्लोटिंग, ऐसिडिटी, आलस, मोटापा, बेली फैट, स्किन प्रॉब्लम और हेयर फॉल जैसी प्रॉब्लम होती है।

तो जानते हैं कि आप इन में से तीन गलतियां कर रहे हो या सातों के सात, साथ ही आप सिर्फ गलतियां नहीं हरेक गलती को सुधारना भी जानेंगे।

Adopting Mindful Eating Habits

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पर आप ये भी कह सकते हैं कि, मेरा खाना ठीक चल रहा है। मुझे तो कोई दिक्कत की बात ही नहीं है तो मुझे इसकी क्या जरूरत।

तो क्या आप, 

  1. खाना खाने के बाद एकदम हल्का महसूस करते हैं। 
  2. क्या सुबह से लेकर रात तक एकदम एनर्जेटिक फील करते हैं। 
  3. क्या आप अपने आइडियल वेट पर हैं। 

अगर इनमें से एक भी सवाल का जवाब ना है तो मतलब आप इन 7 में से कोई न कोई गलती जरूर कर रहे हैं।

तो जानते हैं, ये गलतियां हैं क्या और आप इन्हें ठीक कैसे कर सकते हैं – Adopting Mindful Eating Habits

1. बिना भूख के भोजन खाना 

Eating Without Hunger
Eating Without Hunger
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हम सब ने यह अनुभव किया है, स्पेशली लॉकडाउन में, हर दो घंटे में फ्रिज खोल के सामने खड़े हो जाते हैं। 

जब आप ऐसे बीच बीच में बार बार खाते रहते हैं तो जब तक लंच या डिनर का टाइम आता है, आपको असली भूख लगती ही नहीं। 

लंच डिनर खाते तो हैं, लेकिन आपकी जठराग्नि यानी आपकी डाइजेस्टिव फायर प्रज्वलित ही नहीं होती और बुझी जठराग्नि पर आप प्लेट भर दाल, चावल, रोटी, सब्जियां, इंग्लिश में डाल देते हैं। 

अब यह बात ध्यान से जानें,

 बिना भूख के खाई हर एक बाइट आपके शरीर के लिए ज़हर है क्योंकि बिना भूख के खाया गया खाना शरीर में पचता ही नहीं, डाइजेस्ट नहीं होता और पचेगा नहीं तो बाहर कैसे निकलेगा।

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वो अंदर ही अंदर पड़ा पड़ा सड़ता रहता है।

तो करे क्या?

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बीच बीच में ये स्नैकिंग और मचिंग बंद करें। 

Munching
Munching

आप समझे कि भोजन खाना हवन करने जैसा है। आप हवन या पूजा करने से पहले उसकी तैयारी करते हैं। 

सारी सामग्री को इकट्ठा करके एक जगह रखते हैं। अपनी सीट पर प्रणाम करके बैठते हैं और धीरे धीरे सामग्री को आग में चढ़ाकर हवन करते हैं। 

क्या आप में से कोई है जो चलते फिरते घूमते भागते बस आग में सामग्री फेंकते रहते हैं, नहीं, क्योंकि आप समझते हैं कि हवन करने का एक नियम होता है, 

लेकिन जब से बात इस पेट में जली आग की आती है तो हम सब कुछ भूलकर, बस चलते फिरते घूमते भागते इसमें सामग्री डालते रहते हैं, जबकि चाहे आग जली भी नहीं हो। 

आप ये समझिए कि भोजन करना एक हवन करने जैसा होना चाहिए। आराम से बैठकर धीरे धीरे पेट की अग्नि में आहुति डालनी चाहिए और आहुति तभी डालनी चाहिए, जब आग अच्छे से जली हो। 

धीमी अग्नि में आहुति यानी भोजन डालेंगे तो अग्नि भी बुझ जाएगी और भोजन भी नहीं पचेगा तो अपने ब्रेकफस्ट और लंच के बीच, लंच और डिनर के बीच और डिनर अब ब्रेकफास्ट के बीच बीच में मुंह जूठा ना करें। 

आपको पता है दुनिया की बेस्ट सॉस कौनसी है। टोमेटो सॉस, शेजवान सॉस, सोया सॉस कौन सी है।

न टमेटो ना शेजवान न सोया, दुनिया की बेस्ट सॉस है, आपकी भूख, जब असली भूख लग रही हो, तो सिंपल सादा खाना भी बहुत टेस्टी लगता है और जब असली भूख के बिना खाते हैं तो खाने को जबरदस्ती चटपटा बनाने के लिए उसमें हम सब कुछ डालने लग जाते हैं। 

नमक, मिर्च, मसाले, तेल, नींबू ये सब डालते रहते हैं तो संक्षेप में सिर्फ तभी खाइए जब असली भूख लगी हो, 

असली भूख वो होती है जो पेट में गुड़ गुड़ के रूप में अनुभव होती है और नकली भूख वो होती है जो हर दो घंटे बाद आपसे कुछ नमकीन कुछ चटपटा कुछ मसालेदार मांगती है। 

अगर भूख न हो तो अपना मील स्किप कर दीजिए। आजकल हम मील्स स्किप करने से डरते हैं, लेकिन बिना भूख के खाना खाना तो उससे भी कई ज्यादा खराब है। 

2. गुस्से, चिड़चिड़ाहट, टेंशन या स्ट्रेस में खाना – Adopting Mindful Eating Habits 

आप इमैजिन कीजिए कि आप एक लंबे दिन के बाद बहुत मेहनत करने के बाद डिनर करने बैठे हैं। प्लेट में आपका मनपसंद खाना रखा है और आपको जबरदस्त भूख भी लग रही है। 

वो पेट में गुड़ गुड़ वाली भूख,

 आप अपनी पहली बाइट उठा के मुंह में डालने ही वाले होते हो और अचानक आपका फोन की घंटी बजती है। 

आपको पता चलता है कि आपके सबसे प्रिय मित्र के साथ एक दुर्घटना घट गई है। अब क्या करेंगे अब उसी वक्त प्लेट को साइड करेंगे। 

अगर आपके घर के बड़े लोग आपको बोले, अरे बेटा थोड़ा तो कुछ खा लो। आप क्या बोलेंगे, नहीं अभी मुझे भूख नहीं लगी, पर 30 सेकंड में आपकी भूख कैसे मर गई क्योंकि जब आपके मन में किसी भी तरह की परेशानी, डर, स्ट्रेस, टेंशन, चिड़चिड़ाहट या गुस्सा होता है, 

आपके शरीर की सारी एनर्जी यहां लग जाती है। जब शरीर की सारी ऊर्जा यहां लग गई तो क्या यहां तक काम करने के लिए ऊर्जा बचेगी नहीं। 

आप जो भी चीज़, दुख, गुस्से या बिना इच्छा के खाते हैं, वो आपके शरीर में जाते ही ज़हर बन जाती है क्योंकि वो पचती ही नहीं और इसका हमारी भारतीय संस्कृति में उदाहरण भी है। 

अगर किसी की मृत्यु हो जाती है जब तक उनका दाह संस्कार नहीं खत्म होता तब तक घर में चूल्हा भी नहीं जलाने देते हैं। 

हमारे पूर्वजों ने ऐसा नियम क्यों बनाया क्योंकि उन्हें पता था परेशानी और दुख के माहौल में परिवार वाले खाना पचा नहीं सकते।

तो जब आप खा भी रहे होते हो तो एकदम खुशी से रिलैक्स हो कर आराम से खाए। 

अब अगर आप खाना खा रहे हो और आपके सामने कोई मारपीट वाली मूवी या फिर कोई दुख भरी न्यूज चैनल चल रही हो या डाइनिंग टेबल पर बैठे बाकी लोग कोई आर्गुमेंट कर रहे हों तो भला आपकी मन की स्थिति शांत कैसे रहेगी। 

खाते वक्त जो भी चीज मन में थोड़ा भी स्ट्रेस दे रही हो, उसको तुरंत हटाए और एकदम स्थिरता, शांति और प्रसन्नता के साथ अपना भोजन खाएं। 

आप देखेंगे इस एक चेंज का आपके डाइजेशन और आपकी हेल्थ पर कितना असर पड़ेगा। 

3. हमेशा कांटा चम्मच के साथ खाना खाना – Adopting Mindful Eating Habits

Eating With Fork
Eating With Fork

अंग्रेज हमारे देश में बहुत कुछ छोड़ कर गए हैं। उनमें से एक हैं काँटे और चम्मच। 

आज जहां देखो लोग कांटे चम्मच और चाकू से खाते रहते हैं, लेकिन हमारे वेदों में हमेशा हाथ से ही खाना सिखाया है, क्यों, क्योंकि जब आप अपने भोजन को उंगलियों से छूते हैं, 

आपकी उंगली में मौजूद नर्व ऐडिंग्स के द्वारा आपके दिमाग को तुरंत सिग्नल जाता है कि अब खाना आने वाला है और फिर वही सिग्नल आपका दिमाग आपके पेट, आँतों, लिवर, किडनी सब को भेजता है।

तो ऐसा करने से आपके सभी अंग खाना आने से पहले ही तैयार रहते हैं। 

पेट डाइजेस्टिव ज्यूस यानि पाचन रस छोड़ने लगता है। लिवर बाइल छोड़ने लगता है और आंते ल्युब्रिकेंट होने लगती है। 

दूसरी तरफ जब हम कांटा चम्मच से खाते हैं तो शरीर को सिग्नल नहीं मिलता। हाथ से खाने का एक और फायदा ये है कि हमारे हाथ हमें कुछ ज्यादा ठंडा या ज्यादा गरम खाने ही नहीं देते।  

भगवद् गीता में भगवान कृष्ण हमें बताते हैं कि हमें कभी कुछ ज्यादा ठंडा या ज्यादा गरम नहीं खाना चाहिए। 

तो अगली बार आपकी प्लेट के साइड में कांटा चम्मच रखा हो, तो आप उनको करिए साइड और बेझिझक अपने हाथों से खाइए और हाथों से खाते वक्त कभी कोई शर्म मत कीजिए। 

दुनिया को दिखाइए कि खाना खाने का सही तरीका क्या है हमारा भारतीय तरीका। 

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4. बहुत सारे पकवान साथ में मिला देना – Adopting Mindful Eating Habits

Eating many Foods
Eating many Foods

क्या कभी आपने ऐसी दिखने वाली थाली खाई है? थोड़ी दाल उसके साथ थोड़ा चावल और दो रोटी तो बनती ही है। साथ में दो तीन तरह की सब्जी, कुछ कटा हुआ सैलेड, रायता, अरे पापड़ के बिना स्वाद कैसे आएगा ,तो थोड़ा पापड़ और हां चटनी अचार तो भूल ही गए। 

और क्यों न इन सबके बाद कुछ मीठा हो जाए। ऐसी प्लेट को आप जितनी मर्जी भूख के साथ क्यों न खा लो, जितने मर्जी आराम के साथ हाथों के साथ क्यों न खा लो। 

आपका पेट बेचारा कन्फ्यूज हो जाएगा कि पचाए क्या।

ये जानिए कि आपका पेट एक बार में एक ही तरह का खाना पचा सकता है। वो एक बार में एक ही प्रकार का पाचक रस यानि डायजेस्टिव जूस रिलीज कर पाता है तो जब आप उसको कुछ ऐसा भोजन देते हैं जिसमें बहुत सारी अलग अलग सामग्री हो,

 आपका पेट उसको पचाने के लिए इतने अलग अलग तरह के पाचक रस छोड़ ही नहीं पाता।

तो फिर क्या होता है, जो खाना नहीं पच पाता वो अंदर पड़ा पड़ा शरीर में सड़ता है और ऐसिडिटी, हेडेक, मोटापा, पिम्पल्स, आलस जैसी प्रॉब्लम्स पैदा करता है। 

तो क्या करें एक बार में एक ही चीज खाएं। 

अगली बार जब टेबल पर आठ नौ अलग अलग आइटम्स पड़ी हो, सब लेने के बजाए कोई दो तीन ही चूस कीजिए। 

एक बार में बहुत अलग अलग अनाज को मिलाने की बजाय एक ही अनाज खाएं। चावल और रोटी अगर दोनों पड़े हैं तो कोई एक ही उठाएं। 

5. अच्छे से चबाकर न खाना – Adopting Mindful Eating Habits

Not Chewing Properly
Not Chewing Properly

चबाना जानते हैं, मगर करते नहीं। बचपन से सुनते आए हैं कि 32 बार चबाकर खाना खाना चाहिए, लेकिन करे क्या, हम इसका महत्व ही नहीं समझते? 

बस टीवी देखते देखते, बात करते करते, बिना प्लेट को देखे ही खाना को गटक लेते हैं, 

लेकिन अब से एक रोज ध्यान रखना किसी भी भोजन को अंदर लेने से पहले इतना चबाएं कि वह जूस में कनवर्ट हो जाए। 

जब तक आप चबा चबाकर उसका जूस नहीं बनाते उसको अंदर मत लीजिए, क्यों, क्योंकि जितना ज्यादा चबाते हैं उतना ज्यादा सलाइवा निकलता है और जितना ज्यादा सलाइवा निकलेगा, उतना आसान होगा खाने को पचाना।

इसको एक और तरीके से समझते हैं। 

आपने आलू तो कभी पहले उबाला ही होगा। अगर आप पूरे आलू को बिना काटे ऐसे का ऐसा उबाल देते हैं तो उबालने में करीब 15 मिनट लगते हैं।  

लेकिन जब आप उसको छोटा छोटा काटकर उबालते हैं तो कितना समय लगता है मुश्किल से सात मिनट और ऑलमोस्ट आधा समय,

 बस एक्जेक्टली यही होता है, आपके पेट के साथ। बिना अच्छे से चबाए खाएंगे तो भोजन को करीब 20 घंटे लग जाएंगे, पचाने में, लेकिन उसी चीज को एकदम चबा चबाकर जूस बना कर खाएंगे तो सिर्फ नौ दस घंटो में अच्छे से पच जाएगा और 

ऊपर से आप शरीर में एनर्जी, हल्कापन, मेंटल क्लैरिटी, सब ज्यादा अनुभव करेंगे, क्योंकि जो काम आपके दांत कर सकते हैं, वो आपकी आंतें कभी कर ही नहीं सकती।

 ये सब तो ठीक है लेकिन इसको करें कैसे।

जैसे ही प्लेट सामने आती है, धड़ाधड़ खाने शुरू हो जाते हैं। चबाने के बारे में तो याद भी नहीं रहता और जब याद आता है तब खाना खत्म हो जाता है।

देखिए दो चीजें हैं। अगर आपने इनको कर लिया तो खुद ब खुद मुंह अच्छे से चबाना शुरू हो जाएगा। 

पहली छोटी बाइट्स लीजिए, अक्सर लोगों की एक बाइट करीब आधी रोटी के बराबर होती है। अगर आप इतनी बड़ी बड़ी बाइट खाते हैं तो पेट तो छोड़ो, दांत भी अपना काम अच्छे से नहीं कर पाएंगे।

तो छोटी छोटी बाइट लें। 

दूसरे, जब खाते हैं तो खाने पर ध्यान दें। 

हम इंसान अलग ही है। पूरा दिन खाने के बारे में सोचते रहते हैं, लेकिन जब खाना प्लेट में आता है तो उसके बारे में सोचने की बजाय दुनिया भर की सोच विचार में लग जाते हैं। 

अगर आप खाते समय पांच अलग अलग चीज कर रहे हैं तो चबाने पर ध्यान जा ही नहीं सकता तो बस छोटी बाइट ले और शांति से बिना ज्यादा डिस्ट्रैक्शन के खाइए, चबाने में खुद ध्यान चला जाएगा। 

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6.  एकदम ऊपर तक ठसाठस पेट को भर के खाना – Adopting Mindful Eating Habits

Over Eating
Over Eating

आप किचिन में जाइए और एक मिक्सी लीजिए। उसको ऊपर तक ठसाठस भर दीजिए। 

फिर उसको ऑन करें, क्या होगा , कुछ मिक्स हो पाएगा, नहीं बिल्कुल नहीं। 

चलो ब्लेंडर छोडो, वॉशिंग मशीन को देख लो। अगर उसको आप ठसाठस कपड़ों से भर देंगे, क्या कपड़े धुल पाएंगे नहीं, क्यों,

क्योंकि प्रकृति का नियम है कि कुछ चीज मिक्स करने के लिए थोड़ी जगह खाली छोड़नी पड़ती है। हम अपनी मिक्सी के साथ ऐसा कभी नहीं करते तो पेट के साथ ऐसा क्यों करते हैं। 

एकदम दबाकर खाना मानो कोई नया रिवाज बन गया है। हमें लगता है अगर पेट पूरा नहीं भरेंगे तो कमजोर पड़ जाएंगे,

 तो क्या करें? 

हमारे शास्त्र सिखाते हैं कि पेट को सिर्फ आधा ही खाना से भरना चाहिए। एक चौथाई हिस्सा पाचक रस छोड़ने के लिए रखो और एक चौथाई हिस्सा खाली रखो, मंथन क्रिया के लिए।

लेकिन पता कैसे लगेगा कि पेट कितना भर गया, इस नियम को प्रैक्टिकली फॉलो कैसे करें?

आसान है जब आपका दूसरी सर्विंग लेने का मन करे तो दो मिनट रुकिए।

दो मिनट बाद अगर आपको फिर भी लगता है कि आपको वो दूसरी सर्विंग चाहिए तो ले लीजिए, लेकिन ब्रेक देने से अक्सर आपको पता चल जाएगा कि वो दूसरी सर्विंग लेने का आपका ना मन था और न जरूरत।

आप खुद रुक जाएंगे और हां, एक बहुत जरूरी बात, फर्क नहीं पड़ता है की आप क्या खा रहे हो, आप हरी से हरी सब्जियां क्यों न खा रहे हो, फल मेवे, पोषण से भरा भोजन क्यों न खा रहे हो,

 अगर ज्यादा खा लिया तो वो सब अंदर जा कर कचरा ही बनेगा, तो टेबल से उठने से पहले पेट में थोड़ी जगह जरूर खाली छोड़ें। 

7.  भोजन के तुरंत बाद काम पर लग जाना – Adopting Mindful Eating Habits

Working Just After eating
Working Just After eating

काम और पाचन को अलग अलग रखना आवश्यक है ताकि दोनों के बीच मुकाबला ना हो। 

ऐसा क्यों,

क्योंकि आपका शरीर एक बार में एक ही काम अच्छे से कर सकता है या तो डाइजेशन का काम या फिर सोच विचार, पढाई लिखाई का काम। 

आप जब खाने के तुरंत बाद अपने काम पर लग जाते हैं तो आपके शरीर में लड़ाई शुरू हो जाती है। पेट कहता है पूरी शरीर की शक्ति मुझे चाहिए वरना मैं ये खाना कैसे डाइजेस्ट करूंगा और दिमाग कहता है नहीं सारी शक्ति मुझे चाहिए वरना मैं सोच विचार का काम कैसे करूंगा। 

अल्टीमेटली होता यह है आपकी शरीर की शक्ति दोनों कामों में आधी आधी बढ़ जाती है और दोनों ही काम अच्छे से नहीं हो पाते। 

काम में नींद और आलस आता है और साथ ही साथ पेट खाया भोजन पचा नहीं पाता।

इसीलिए दुनिया के इतने देशों में एक्स्ट्रा टाइम बनाया गया है, जिसमें दोपहर में लंच के बाद दुकानें और ऑफिस सब कुछ थोड़ी देर के लिए बंद कर देते हैं। 

स्पेन, मेक्सिको, फिलीपीन्स और चाइना सब जगह दिन में आराम किया जाता है क्योंकि उन लोगों को मालूम है कि अनाज खाने के बाद या तो हम बाहर का काम कर सकते हैं या अंदर का काम। 

और तो और आपने देखा ही होगा जो लोग मजदूरी का काम करते हैं वो कभी भी खाने के बाद तुरंत काम पर नहीं लगते, थोड़ी देर ब्रेक लेते हैं। 

अगर आप भी अच्छी स्वास्थ्य पाना चाहते हैं तो किसी भी अनाज वाले भोजन के बाद कुछ देर आराम कीजिए। 

कितनी देर, कम से कम 10 मिनट और ज्यादा से ज्यादा 30 मिनट, जितना भी आपके पास समय हो। 

इस समय आप सोना चाहे तो सो भी सकते हैं। ध्यान रखें खाने के तुरंत बाद ही लेटना नहीं चाहिए। दो तीन मिनट या 100 कदम वॉक करने के बाद ही लेटें। 

अब अगर आप ऑफिस जाते हैं तो आप लंच के बाद सो नहीं सकते। ऐसे में अब आप सिम्पली सिर टेबल पर रख कर 10 मिनट के लिए आंखें बन्द कर लीजिए, और लेकिन मैं करूंगा कैसे। 

अगर मेरे बॉस ने मुझे सोते हुए देख लिया तो बस हो गया काम। 

अगर आपकी जॉब ऐसी है कि आप लंच के बाद बिल्कुल ही rest नहीं ले सकते तो आपके पास दो उपाय हैं।

 पहला लंच में हल्का भोजन ले, जैसे कि, सूप या सैलेड। आराम करने की जरूरत सिर्फ अनाज वाली भोजन खाने के बाद ही होती है। 

हल्के खाने जैसे कि सैलेड, फल, स्मूदी या सूप के बाद आराम नहीं भी करेंगे तो चलेगा क्योंकि उनको पचाना बहुत आसान होता है। 

दूसरा यदि आप लंच में अनाज वाला भोजन ही पसंद करते हैं तो आप अपने बॉस या एचआर को समझाइए कि लंच के बाद सिर्फ 20 मिनट आराम करने से अगले चार घंटे के लिए आपकी प्रोडक्टिविटी डबल हो सकती है। 

अब आपने जान ली है सातों की सातों गलतियां। 

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Conclusion

अब जानते हैं कि एक परफेक्ट इटिंग एक्सपीरिएंस कैसा होना चाहिए। 

आप टेबल पर खाने तभी बैठें जब आपको तेज भूख लगी हो। मन की भूख नहीं पेट की भूख साथ ही साथ मन एकदम रिलैक्स होना चाहिए। 

मन में कोई जल्दी, गुस्सा, परेशानी, चिड़चिड़ाहट नहीं होनी चाहिए। 

जब खाना परोसे तो दो तीन से ज्यादा चीजें साथ में न मिलाएं। 

अपनी पहली बाइट लेने से पहले हाथ जोड़ के आप जिस भी भगवान को मानते हो उनको धन्यवाद बोले, आपको ये भोजन देने के लिए।

उस किसान को धन्यवाद करें जिसने आपके लिए ये भोजन उगाया है उन सभी लोगों को धन्यवाद करे जिनकी वजह से आप तक ये भोजन आया है। उस कुक को थैंक्यू बोलें जिसने आपके लिए ये भोजन बनाया है। 

इस भोजन को आपकी प्लेट तक लाने के लिए इतने लोगों ने इतनी मेहनत करी है। 

धरती मां ने उसके बीज को पोषित किया है।  सूर्यदेव ने उसको अपनी आग से पकाया है। सिर्फ आपके लिए आपको पोषण प्रदान करने के लिए सबकी मेहनत को पहचानना है। 

दिल से सब को धन्यवाद करके आप अपने हाथों से भोजन को छुईए और उसके टैक्सचर को अपनी उंगलियों पर महसूस कीजिए। 

भोजन खाते खाते उसको चबाना जरूर याद रखें। छोटी छोटी बाइट्स लीजिए और धीरे धीरे खाइए खाते समय भी गहरी सांसें लीजिए। तब तक चबाइए जब तक वो जूस न बन जाए। जूस बनने के बाद ही उसको अंदर कीजिए। 

याद रखिए कि पेट को सिर्फ आधा ही भरना है। जरूरत से ज्यादा न खाइए टेबल से उठने से पहले पेट में जगह जरूर खाली छोड़ें। भोजन के कुछ देर बाद आराम जरूर करें। 

डायरेक्ट काम पर ना लगे जब आप भोजन करते समय ये सिंपल सिद्धांत फॉलो करेंगे, आपको उसी भोजन से ऊर्जा बहुत ज्यादा मिलेगी। 

उम्मीद करती हूँ आपके लिए ये आर्टिकल फायदेमंद सिद्ध होगा

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