Piles – Haemorrhoids -Bawaseer – Bawasir in Hindi – बवासीर लक्षण घरेलू उपाय

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Piles – Haemorrhoids -Bawaseer – Bawasir in Hindi – बवासीर लक्षण घरेलू उपाय

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Piles – आज के time में अनियमित खानपान  के साथ ही  Tension के चलते कई तरह के रोगों ने लोगों को अपनी गिरफ्त में लेकर मरीज बना दिया है। 

ऐसे में जहां कुछ उपायों  से हम ये बीमारियों लगभग ठीक  कर सकते हैं, वहीं information के अभाव में इन उपायों को नहीं आजमाने के चलते हम long time तक रोगियों का जीवन जीने को मजबूर होते रहते हैं।

ऐसी ही एक बीमारी जो आज के दौर में तेजी से फैल रही है, वह है बवासीर यानि Piles ..

बवासीर को Piles या Hemorrhoids भी कहा जाता है। Bawaseer एक ऐसी बीमारी है, जो बेहद तकलीफदायक होती है। इसमें गुदा (Anus) के अंदर और बाहर तथा मलाशय (Rectum) के निचले हिस्से में swelling आ जाती है। इसकी वजह से गुदा के अन्दर और बाहर, या किसी एक place पर मस्से बन जाते हैं। 

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मस्से कभी अन्दर रहते हैं, तो कभी बाहर आ जाते हैं। करीब 60 percent लोगों को उम्र के किसी न किसी पड़ाव में Bawaseer की problem होती है। Patient को सही time पर piles का Treatment कराना बहुत ज़रूरी होता है। समय पर बवासीर का इलाज नहीं कराया गया तो तकलीफ काफी बढ़ जाती है।

भगन्दर/Fistula

यह एक अनुवांशिक (hereditory) problem भी है। यदि family में किसी को यह problem रही हो, तो इससे दूसरे व्यक्ति को होने की आशंका रहती है। बहुत पुराना होने पर यह भगन्दर का रूप धारण कर लेता है जिसे फिस्टुला (Fistula) भी कहते हैं। इसमें असहनीय जलन और पीड़ा होती है।


Types of Piles / Hemorrhoids) – Bawaseer के प्रकार


बवासीर दो प्रकार की होती हैं, जो ये हैं-

1. खूनी बवासीर – Internal Haemorrhoids

Internal Hemorrhoids Symptoms

  • खूनी बवासीर में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती है।
  • इसमें मलत्याग करते समय खून आता है।
  • इसमें गुदा (anus) के अन्दर मस्से हो जाते हैं।
  • मलत्याग के समय blood मल के साथ थोड़ा-थोड़ा टपकता है, या पिचकारी के form में आने लगता है।

मल त्यागने के बाद मस्से अपने से ही अन्दर चले जाते हैं। गंभीर stage में यह हाथ से दबाने पर भी अन्दर नहीं जाते (Prolapsed haemorrhoids)। इस तरह के बवासीर का तुरंत treatment कराएं।

2. बादी बवासीर – External Haemorrhoids

External Hemorrhoids Symptoms

  • बादी बवासीर में पेट की problem अधिक रहती है।
  • कब्ज एवं gas की problem बनी ही रहती है।
  • इसके मस्सों में blood नहीं निकलता। 
  • यह मस्से बाहर easily  देखे जा सकते हैं।
  • इनमें बार-बार itching और जलन होती है।
  • शुरुआती stage में यह तकलीफ नहीं देते, लेकिन लगातार अस्वस्थ खान-पान unhealthy diet और कब्ज रहने से यह फूल जाते हैं। इनमें खून जमा हो जाता है, और swelling हो जाती है (thrombosed external hemorrhoid)।

Thrombosed External Hemorrhoid –

  • इसमें भी असहनीय pain होती है, और रोगी दर्द से छटपटाने लगता है।
  • मलत्याग करते समय, और उसके बाद भी रोगी को pain बना रहता है।
  • वह स्वस्थ तरह से चल-फिर नहीं पाता, और बैठने में भी तकलीफ महसूस करता है।
  • इलाज कराने से यह problem ठीक हो जाती है।


Piles Symptoms – Bawasir / बवासीर होने के लक्षण

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कई बार बवासीर यदि गंभीर stage में ना पहुंचा हो तो यह 4-5 days में अपने आप ही ठीक हो जाता है, लेकिन रोग बढ़ने पर ये लक्षण देखे जा सकते हैं-

Symptoms of piles in male – Symptoms of piles in female – Hemorrhoids symptoms

  • गुदा के आस-पास कठोर गांठ जैसी महसूस होती है। इसमें pain रहता है, तथा blood भी आ सकता है।
  • शौच के बाद भी पेट साफ ना होने जैसा लगना
  • मल के साथ लाल चमकदार blood का आना।
  • शौच के वक्त अत्यधिक pain होना।
  • गुदा के आस-पास खुजली (hemorhoid Itch), एवं लालीपन, व swelling रहना।
  • शौच के वक्त mucus का आना।बार-बार मल त्यागने की urge होना, लेकिन त्यागते समय मल न निकलना।

इन Piles symptoms को बिल्कुल भी नजरंदाज ना करें। जल्द से जल्द doctor के पास जाकर piles का इलाज  कराएं (signs of piles)।


What Causes Piles – बवासीर होने के कारण (Piles Causes)

Ayurveda में Bawaseer को ‘अर्श’ कहा गया है। 

यह वात-vata dosha, पित्त-Pitta dosha एवं कफ-Kapha dosha, तीनों दोषों- dosha, के दूषित होने से होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग कहा गया है। 

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ये मुख्यतः2 प्रकार के बताए गए हैं-

Ayurveda- Piles Causes

1. शुष्क अर्श

जिस बवासीर में वात या कफ की प्रधानता होती है, वे अर्श शुष्क होते हैं। इसलिए मांसांकुरों में से स्राव (bleeding)नहीं होता है।

2. आर्द्र अर्श

जिस अर्श में रक्त या पित्त या रक्तपित्त की प्रधानता होती है, वे आर्द्र अर्श होते है। इसमें रक्तस्राव (bleeding) होता है। 

इसके अतिरिक्त शुष्क अर्श में pain ज्यादा होती है।

कुछ लोगों में यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी देखा जाता है, लेकिन कुछ में अन्य causes से भी होता है, जो ये हैं-

Piles Other Causes

  • 1. कुछ व्यक्तियों को अपने काम के type की वजह से घंटे खड़े रहना पड़ता है, जैसे- bus कंडक्टर, ट्रॉफिक police इत्यादि। 
    2. इसके साथ ही जिन्हें भारी वजन उठाना पड़ता है। इन लोगों को बवासीर से ग्रस्त होने की अधिक संभावना रहती है।
    3. कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज या constipation होने से  मल सूखा एवं कठोर होता है, जिसकी वजह से व्यक्ति को मलत्याग करने में कठिनाई होती है। 
  • काफी देर तक उकड़ू बैठे रहना पड़ता है। इस कारण से वहां की blood vessels पर जोर पड़ता है, और वह फूलकर लटक जाती है, जिन्हें मस्सा कहा जाता है।
    4. अधिक तला एवं मिर्च-मसाले युक्त (spicy) भोजन करना।
    5. शौच ठीक से निवृत ना होना।
    6. Fiber युक्त भोजन का सेवन न करना।
    7. महिलाओं में गर्भवती अवस्था (obstetric fistula) में और डिलीवरी के दौरान गुदा क्षेत्र पर प्रेशर पड़ने से बवासीर होने का खतरा रहता है।
    8. आलस्य या शारीरिक activity कम करना।
    9. Smoking और शराब का सेवन।
    10. अवसाद- डिप्रेशन, जिससे पाचन तंत्र धीमा हो जाता है और फिर problem होती है।

बवासीर / Bawaseer एवं भगन्दर / bhagandar में अन्तर (Difference between Piles and Fistula)

बवासीर में गुदा (anus) एवं मलाशय (rectum) के निचले भाग की blood vessels में सूजन आ जाती है। ऐसा लम्बे समय तक constipation और शौच में अत्यधिक समय तक बैठे रहने से होता है।

इसके अलावा मोटापा या pregnant महिलाओं में भी यह होने का खतरा रहता है। इसमें गुदा (anus) या मलाशय (rectum) में मस्से बन जाते हैं, जिनके फटने पर इनसे ब्लड निकलता है, और दर्द होता है।

भगन्दर में मस्से नहीं होते हैं। भगन्दर में एक घावयुक्त नली बन जाती है, जो गुदा नलिका (internal opening) तथा गुदा के बाहर (external opening) की skin में होती है।

भगन्दर उन लोगों में होता है, जिनके मलद्वार (anus) के पास कोई फोड़ा हो जाता है। फोड़े में कई मुंह बन जाते है। ऐसे में यदि रोगी व्यक्ति उससे छेड़छाड़ करता है तो भगन्दर हो जाता है।

इसमें से खून और pus लगातार निकलता रहता है। शुरुआती अवस्था में इसमें pus और blood की मात्रा कम होती है। इसलिए इससे रोगी के कपड़ों में केवल दाग मात्र लगता है। धीरे-धीरे रिसाव बढ़ता जाता है, और रोगी को खुजली, बेचैनी और pain होने लगता है।

Piles Prevention- Bawaseer – बवासीर से बचाव

Starting में अक्सर लोग इसे दूसरों से छुपाते हैं और अपने आसपास के लोगों के साथ share करने में भी कतराते हैं लेकिन यह बीमारी हमारे पेट से शुरू होती है और जितनी भी बीमारी हमारे पेट से संबंधित होती है उन्हें शुरुआत में तो बहुत आसानी से ठीक किया जा सकता है लेकिन अधिक समय हो जाने के बाद इन problems से छुटकारा पाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर पहले दिन से ही इस पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है.

सबसे पहले तो आप के लिए यह जानना जरूरी है कि यह बीमारी रातों-रात या 1 दिन या 1 week में ठीक हो जाने वाली बीमारियों में से नहीं है क्योंकि ये एक ऐसी बीमारी है जो कि समय के साथ-साथ होती है और समय के साथ साथ ही बढ़ती जाती है इसलिए इसका treatment भी समय के साथ साथ ही होता है और इसे पूरी तरह ठीक करने के लिए कुछ परहेज और सावधानी बरतने के साथ-साथ एक से अधिक उपाय करने की भी जरूरत होती है.

बवासीर को ठीक करने के लिए सबसे पहले तो हमें अपनी नियमित दिनचर्या (regular daily routine) रखनी जरूरी होती है। वहीं भोजन में fiber foods इस बीमारी से खुद को सुरक्षित रखने में help करते हैं। इसके अलावा भी कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनसे इस disease में काफी आराम मिलता है।

तो आइये जानते हैं, बवासीर, piles या hemorrhoid की इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के कुछ बहुत ही असरदार और कामयाब उपाए जिनका रोजाना इस्तेमाल करने से bleeding और pain की समस्या बहुत तेजी से खत्म होगी और पुराने से पुराना piles भी हमेशा के लिए दूर हो जाएगा.

इसके साथ ही हम यह भी जानेंगे कि इस problem में तुरंत आराम पाने और इसे वापस आने से रोकने के लिए किस तरह की चीजें हमें ज्यादा खानी चाहिए और कौन-कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए।

Piles Treatment In Hindi – बवासीर का इलाज हिंदी में जानिए

Hemorrhoids Home Remedies

1.Jatyadi oil / jatyadi taila / जात्यादि तेल

Piles की बीमारी को बाहरी रूप से तेजी से ठीक करने के लिए जात्यादि oil सबसे अधिक लाभदायक होता है। जात्यादि तेल मुलेठी, हरड़, शहद और हल्दी जैसी 20 प्राचीन Ayurvedic जड़ी बूटियों से मिलकर बना होता है जो की पूरी तरह natural होता है इसका इस्तेमाल घावों को भरने तथा skin से संबंधित कहीं तरह के रोगों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।

सकी सबसे खास बात यह है कि इसका असर piles के मस्सों पर बहुत तेजी से होता है ओर  एक बार ठीक हो जाने पर यह उस जगह का infection भी पूरी तरह ठीक कर देता है, जिससे कि यह problem दोबारा कभी नहीं होती है।

कैसे प्रयोग करें?

  • इसका इस्तेमाल करने के लिए  cotton के एक टुकड़े को जात्यादि oil से अच्छी तरह भिगो लें इस भिगोए हुए cotton ball को अपने  गुदा द्वार (anus) पर लगाकर हल्के हाथों से अंदर की तरफ दबाए ऐसा करने से cotton में मौजूद तेल निकल कर अंदर rectum की ओर जाएगा और वहां पर मौजूद affected area को तेजी से heal करेगा।
  • इसमें एक बार में हमें 2 ml से 3ml से ज्यादा Jatayadi oil का use नहीं करना है अगर आपको मस्से अंदर की तरफ हैं तो कोशिश करे की यह oil ज्यादा से ज्यादा अंदर तक पहुंच सके।
  • इसका इस्तेमाल एक दिन में 3-4 बार या फिर दिन भर में जितनी भी बार आप शौचालय जाते हैं तब हर बार fresh होने से पहले और fresh हो जाने के बाद इस तेल का प्रयोग करें और साथ ही रात को सोने से पहले भी इस oil को जरूर लगाएं।
  • रात में जात्यादि oil में भिगोए हुए cotton को रात भर के लिए उस जगह पर ही लगा रहने दें ऐसा करने से इसका effect दुगनी रफ़्तार से होता है। 
  • बवासीर की बीमारी में जात्यादि तेल का प्रयोग आयुर्वेद में पुराने time से किया जाता रहा है एक week तक इसका प्रयोग करते रहने से आप बहुत फर्क महसूस करेंगे।

लेकिन अच्छे results के लिए इसके साथ कुछ और घरेलू नुस्खों का भी use किया जाना चाहिए।

Read more, Chia Seeds in Hindi-जानें चिया सीड के बारें में, क्या हैं लाभ और नुकसान


2. जामुन के बीज

इसके लिए अगला जो नुस्खा है उसे बनाने के लिए हमें जरूरत होगी,

आम का बीज खूनी piles में बहुत लाभदायक होता है। जिन लोगों को भी piles की बीमारी के चलते ज्यादा समय हो गया है और अक्सर blood आने की problem बनी ही रहती है (external hemorrhoid bleeding) ऐसी स्थिति में आम के बीज बहुत अधिक उपयोगी होते हैं। 

इसे बनाने के लिए सबसे पहले आम और जामुन के बीजों को अच्छी तरह dry कर लें और इनका powder बना लें।

आम के बीज का powder बनाने के लिए सूखने के बाद इसके अंदर वाले हिस्से का ही प्रयोग करें।

  • इसके बाद 50 ग्राम जामुन के बीज में ,
  • 25 से 30 ग्राम आम की गुठली का पाउडर और 
  • 25 ग्राम भुने हुए जीरे का पाउडर डालकर, 
  • सारी चीजों को अच्छी तरह से mix कर ले इस तरह से यह नुस्खा तैयार हो जाएगा।


कैसे प्रयोग करें?

इस तैयार powder का सेवन एक चम्मच daily सुबह-और दिन के खाना खाने के बाद बहुत हल्के गर्म पानी के साथ मिलाकर करें। इस नुस्खे का प्रयोग हमें सुबह और दिन के खाने के बाद ही करना है रात के खाने के बाद इसका प्रयोग नहीं करना है।

कैसे करता है फायदा?

  • इसमें मौजूद जामुन के बीज हमारे पेट को साफ करते हैं और हमारे मल (stool) को भी नरम बनाते हैं जिससे कि fresh होते समय हमें ज्यादा जोर नहीं लगाना पड़ता।
  • और साथ ही हर तरह के infection को भी तेजी से खत्म करता है.

3. इसके अलावा एक और Ayurvedic उपाय है जो कि Hemorrhoids में बहुत अधिक फायदेमंद होता है वह है, 
Abhyarisht.

अभयारिष्ट

Abhyarisht piles के लिए एक बहुत अच्छी  आयुर्वेदिक दवा है यह आपको किसी भी medical store या online मिल जाएगी।
Abhyarisht का प्रयोग पेट से जुड़े सभी तरह के रोगों के लिए किया जाता है और खासकर piles में यह बहुत अधिक लाभकारी होती है।


जात्यादि तेल की तरह यह भी Ayurved की 15 से अधिक जड़ी बूटियों से मिलकर बना है। बवासीर में होने वाले असहनीय pain के लिए यह बहुत helpful होती है।


कैसे प्रयोग करें?

इसका प्रयोग करने के लिए एक cup हल्का गर्म पानी लें और उसमें दो से तीन tsf अभयारिष्ट मिलाकर रोजाना सुबह-शाम खाना खाने के 1 घंटे बाद सेवन करें लगातार इसका प्रयोग करते रहने से आप देखेंगे कि दिन-प्रतिदिन आपका pain कम होता जाएगा और piles की बीमारी में भी सुधार आता जाएगा।

सावधानी

Abhyarisht का प्रयोग एक बार में 15 से 20 ml से अधिक ना करें और साथ ही pregnancy के दौरान इसका सेवन करना हानिकारक हो सकता है इसलिए Pregnant महिलाएं इसका सेवन बिल्कुल ना करें।

4. मूली और करेले का रस

इसके अलावा कुछ और साधारण खाए जाने वाली चीजें होती है जो कि piles हो जाने पर बहुत फायदेमंद prove होती है। 
इसके लिए मूली और करेले का रस भी बहुत लाभदायक होता है।

जिन लोगों को भी खूनी, बादी या किसी भी तरह के बवासीर की problem है उन्हें एक हफ्ते में तीन बार, एक cup करेले का रस और एक cup मूली का रस जरूर पीना चाहिए।

ऐसा करने से infection तेजी से ठीक होता है और बुरे से बुरे pain में भी तुरंत आराम मिलता है।


5. Fruits To Be Taken

Fruits में, नारियल पानी, पपीता, तरबूज, बेल का फल और जामुन बहुत लाभकारी होते हैं।

बेल का फल

बेल का फल piles में एक चमत्कारी औषधि की तरह काम करता है। जिन लोगों को भी बुरे से बुरा कब्ज या acidity की problem है, उन्हें week में तीन बार इसका शरबत या powder का प्रयोग जरूर करना चाहिए।

नारियल पानी- Coconut Water

इसके साथ ही daily एक time नारियल पानी भी जरूर पीयें। नारियल हमारे पेट को गर्म होने से रोकता है। Piles के दौरान पेट में बढ़ी जरा सी गर्मी भी अचानक या फिर fresh होने के बाद होने वाले pain का कारण बन सकती है। ऐसे में रोजाना खाली पेट आधा glass नारियल पानी पीना बहुत उपयोगी होता है।

6. फ्रेश दही – Yogurt / Curd

इसके अलावा पेट को ठंडा रखने के लिए फ्रेश बना हुआ दही भी बहुत लाभकारी होता है। रोजाना सुबह breakfast में  नमकीन दलिया के साथ दही का प्रयोग करने से शरीर में fiber की मात्रा भी बढ़ती है और पेट की गर्मी भी control में रहती है।

7. Vegetables – सब्जियां

सब्जियों में पालक (Spinach) और कटहल (Jack Fruit) बहुत अधिक लाभकारी होते हैं क्योंकि इन दोनों में ही iron और fiber की मात्रा अधिक होती है जो कि बवासीर की बीमारी में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शरीर में iron और fiber प्रचुर मात्रा में होने से  stool पास करने में, मल विसर्जित करने में किसी भी तरह की तकलीफ नहीं होती है और शरीर में आई कमजोरी भी दूर हो जाती है।

8. अनाज

अगर आप रोजाना रोटी खाते हैं तो खाने में रोटी की मात्रा कम करके आप अपना आधा पेट seasonal fruits और green salad से भरे और साथ ही गेहूं के आटे की जगह रोटी बनाते समय उसमें कुछ मात्रा में जौ का आटा भी mix कर दें।

9. पानी

इसके अलावा piles होने पर शरीर में पानी की कमी होना इस बीमारी को और बदतर बना सकता है इसलिए दिन भर में ज्यादा से ज्यादा पानी पिए, लेकिन 1 घंटे में 250 ml से ज्यादा पानी ना पिए।

Piles या बवासीर की बीमारी एक बहुत ही गंभीर और दर्दनाक बीमारी है इसलिए चाहे इसकी शुरुआती stage हो या फिर यह ठीक होने वाला हो, बिना खान-पान में परहेज किए या बिना सावधानी बरतें इसे जड़ से खत्म करना असंभव है।

Read more, जानिए क्यों है मिट्टी के घड़े से पानी पीना अमृत के समान | Benefits of Clay Water Pot

क्या न खाएं

1.तीखा या मसालेदार भोजन

खानपान में ज्यादा तीखा या मसालेदार भोजन (spicy and oily), जितने समय आपको यह तकलीफ है उतने समय के लिए पूरी तरह से ही छोड़ दें और अगर आप थोड़ा सा तीखापन चाहते हैं तो केवल हरी मिर्च का इस्तेमाल करें लाल मिर्च का इस्तेमाल बिल्कुल ना करें। 

लेकिन अगर आप अनजाने में कुछ तीखी या मसालेदार चीज खा लेते हैं तो उसके बाद अपने पेट में होने वाली गर्मी को ठीक करने के लिए जीरे और पुदीने का juice जरूर पिएं या फिर तुरंत एक glass नारियल पानी का सेवन करें। 

2. वायु और fat युक्त भोजन न खाएं

Haemorrhoid होने पर मस्से होना और उन में से blood आने की problem होती है. यह मस्से बड़ी हुई वायु या fat का ही एक रूप होते हैं, इसलिए इस बीमारी में ऐसी चीजों का प्रयोग करना जो कि हमारे शरीर में वायु और fat की मात्रा को और अधिक बढ़ाएं, वह भी इस बीमारी को double speed से बढ़ा सकता है।

इसलिए जितनी भी मैदे से बनी हुई चीजें होती हैं, जैसे कि bread, toast, biscuit, इस तरह की चीजों का सेवन कम से कम ही करें, और चर्बी पैदा करने वाली चीजें जैसे कि आलू, चना, चने की दाल, बेसन और सोयाबीन या उस से बनी हुई चीजों से जितना हो सके उतना दूर ही रहे, because, यह सारी चीजें शरीर में पानी को सोख लेती है और कब्ज होने की संभावना को बढ़ाती है।

3. junk food न खाएं

Piles की बीमारी के दौरान हमारा पेट पूरी तरह साफ रहना बहुत जरूरी होता है। अगर piles के दौरान पेट साफ नहीं रहे तो इस बीमारी से बचना असंभव है इसलिए जितनी भी तली हुई चीजें या फिर packing में आने वाली चीजें जिनमें की preservatives की मात्रा अधिक होती है ऐसी चीजों का कम से कम सेवन करें, and, बाहर का junk food खाने की जगह घर पर बना हुआ सादा भोजन ही करें।

4. No High Blood Pressure

Piles की बीमारी में हमारा Blood Pressure पूरी तरह normal होना चाहिए, because, कई बार  बढ़ा हुआ blood pressure ही इस बीमारी को और नासूर बना देता है। इसलिए जो लोग भी धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं और खाने में अक्सर non veg ज्यादा खाते हैं ऐसे लोगों को इस बीमारी के दौरान यह सारी चीजों को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।

5. No Refined Sugar

ज्यादा मीठा या खट्टा भी इस बीमारी को बढ़ा सकता है, खासकर जो बाहर की बनी हुई मीठी चीजें जैसे की ice cream और मिठाई या bakery items, इन सभी चीजों में refined sugar की मात्रा अधिक होती है जो कि हमारे शरीर में पानी को कम करके हमारे मल को सख्त बनाती है, and, कब्ज होने का सबसे बड़ा कारण बन जाती है। 

6. खट्टी चीजें न खाएं

खटाई शरीर में जख्मों को  और ज्यादा पकाने और अधिक गंभीर बनाने में सबसे मुख्य भूमिका निभाती है इसलिए खट्टी चीजें जैसे कि गोलगप्पे, कच्चा आम और इमली, इन से बनी हुई चीजें इस बीमारी के दौरान बंद कर दें ।


इसके साथ ही एक अनुभूत treatment भी मैं आपके साथ share करना चाहूंगी, जो regime में अपने patients के लिए प्रयोग करती हूं।

Piles Treatment In Hindi- My Practice


बादी या शुष्क बवासीर के लिए,

कब्ज के लिए

त्रिफला चूर्ण 5 gm रात को सोते समय गुनगुने पानी से


लगाने के लिए


खूनी या internal bawaseer में,

  • Tab Pilex 2-2 गोली सुबह शाम
  • अर्शकुठार रस 2-2गोली सुबह शाम
  • Tab Styplon 2-2 गोली सुबह शाम
  • अभयारिष्ट 20 ml दवाई में इतना ही पानी मिलाकर दोपहर और रात के खाने के बाद।

लगाने के लिए

अगर आप इन दवाओं का प्रयोग करना चाहते हैं, तो अपने निकटवर्ती आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखरेख में करें या मेरे फेसबुक पेज पर मुझे मेसेंजर में मैसेज करें। 

तो फ्रेंड्स, ये थी विस्तार से जानकारी, Piles – Haemorrhoids -Bawaseer – Bawasir in Hindi – बवासीर लक्षण घरेलू उपाय, के बारे में।

आशा करती हूं, ये आपकी पसंद आयेगीऔर आप इसका लाभ उठायेंगे।

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DrSeema Guptahttps://www.ayurvedguide.com
I am an Ayurvedic Doctor, serving humanity through Ayurveda an Ancient System of Medicine from the last 21 years, by advising Ayurveda principles and healing the ailments. I follow the principle that prevention is always better than cure.

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